Saturday, September 19

विश्वास / हां ………… हैं मुझे विश्वास तुम पर (Romantic,love poem)

विश्वास / हां ………… हैं मुझे विश्वास तुम पर






पहली बार नजरों का टकराव हुआ उस घर पर 

नजरों ने दिल तक को छुआ वहां 

चाहत थी मेरी तुमसे मिलने की 
नजाकत थी जो तुम्हारी मुझसे छिपने की

मानों हठ ही थी मेरी तुमसे मिलने की 
क्योंकि वो भा गई थी खुशबू तुम्हारे बालों की 


उस दिन मेरे दिल की घंटी बजी थी 
क्योंकि वो आवाज़ थी तुम्हारे पैरों की घुंघरू की

मानो बिन स्वरों और धुनों के भी संगीत अच्छा लगने लगा हो  
मानो दिल के तारों से उस वॉयलिन तक प्यार हो


जिसे सुना करता था मैं तुम्हारी याद में 
जिसे ढूंढा करता था मैं हर अवकाश पें  


पर मानो जैसे खो ही गया वो और संग तुम 
मानो जैसे लहरों में छोड़ ही दिया मिलना समुंद्र संग 


माने बादल भी रो रहे हो तुम्हारी याद में 
वो बिछुड़ना हर रोज आता है तुम्हारी याद में ! 
वो बिछुड़ना हर रोज आता है तुम्हारी याद में ! 


अच्छा था वो दिन जब तुम मुझे फिर दिखें 
मेरी खुशकिस्मती थी कि जैसे तैसे तुम्हारे नंबर मिले 


कभी हिम्मत नहीं हो पाई तुम्हें कॉल करने की 
क्योंकि वह जिद नहीं, मोहबत्त थी तुम्हारी इज्जत की 


कैसे बताऊं इन लोगों को कितने मैंने जतन किए 
मेरे सेमेस्टर (semesters) के एग्जाम तुम्हारी चाहत में बिगड़ने दिए 


जबरन करी दोस्तों ने मुझे तुमसे मिलाने की 
कहीं फँस ना जाऊं ये चिंता रात भर सताने लगी 


फिर हिम्मत जुटाई, और फूलों से गुहार लगाई-


कि चलो मिलाता हूं उनसे, 
जिनसे मिले बिना जाना निरर्थक है तुम्हारा इस जीवन में 


फिर कैसे भूल सकते है हम दोनों उस दिन को 
जब तुम्हारी हंसी ने छलनी किया था मेरे दिल को 


नजरों नहीं मांगी थी प्यार करने की इजाजत तुमसे 
हामी नज़र आई मुझे तुम्हारे मुस्कुराते हुए चलते उस रस्ते पें  


कश्तियाँ डुब ने लगी दोनों की रात-रात भर 
भूख प्यास मिट ही गयी दोनों की चाहत पर 


फिर आया एक वो दिन जिसका हम दोनों को था इंतजार 
शादी की घड़ी थी वो पल वो बहार


कभी नहीं भूल पाऊंगा जब बंधे हम उस बंधन में कमी है 
शायद कुछ कमी रह गयी थी उस गठबंधन में 


या तो मैं या फिर तुम ना समझे इस रिश्ते को 
और भूल जाओ अपने उस बीते झगड़े को 


सीखो थोड़ा विश्वास करना मुझ पर 
मत दबाया करो मुझे हर बात-बात पर 


गुस्सा मैं भी सहता हूं रोज़ तुम्हारा 
कभी कभी मेरा गुस्सा भी सहा कर  


मेशा खुद इतना कमाती हो 
कभी कभी तो मुझे भी कमाया 
कभी कभी तो मुझे भी कमाया कर


क्योंकी मैं सिर्फ और सिर्फ विश्वास करता हूं तुम पर 
क्योंकि मैं सिर्फ और सिर्फ विश्वास करता हूं तुम पर 

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