Saturday, September 19

बनो राजनेता/poem on politics

  बनो राजनेता




बनो राजनेता तुम, बनो राजनेता 
निष्पक्ष,सेवाभावी, स्वभाव रखो राजनेता 
इस पद के मिलते ही तुम हो जाओगे शक्तिमान 
शक्ति की अंधड़ में मत करना इसका अपमान 




बनो राजनेता, तुम बनो राजनेता 
निष्पक्ष, सेवाभावी, स्वभाव रखो राजनेता 




इस पद के लालच में ना तुम किसी को बेचना 
शक्तिवान होने के बाद उस ना बिकने वाले को मत फेंकना 
विश्वास जीतना, भरोसा तोड़ना नहीं 
पैसों की आड़ में, तुम अपना काम भूलना नहीं 




बनो राजनेता, तुम बनो राजनेता 
निष्पक्ष, सेवाभावी ,सद्भावना रखो राजनेता  




जरूरत है इस भूमि को तुम इसका साथ देना 
अपनी मर्यादा ना तोड़, कहीं इसे और लूट न लेना 
अपने नेतृत्व क्षमता का सदुपयोग करना 
जो-जो किल्लतें हमने हैं बताई उसे तुम पूरा करना 




बनो राजनेता, तुम बनो राजनेता 
निष्पक्ष, सेवाभावी ,सद्भावना रखो राजनेता  




निर्दयी न होना, भूल मत जाना 
साथी हो या दुश्मन सबका तुम साथ निभाना 
रखना अपने व्यक्तित्व को ऊंचा 
और अपने ज्ञान से देश को जीत दिलाना 




बनो राजनेता, तुम बनो राजनेता 
निष्पक्ष, सेवाभावी ,सद्भावना रखो राजनेता  




जनता का सेवक कहते हो तो,
सेवक जैसे काम कर सेवक बनके दिखलाना 
परोक्ष चरित्र मैं देखूं तुममें, 
जब भी तुम्हारा नाम है सुनना 
और होऊँगा खुश मैं जब तुमसे, 
जब हर घर का बच्चा चाहे तुमसाबनना  




एक और बात कि –


बड़ी ईमानदारी और ध्यान से तुम अपना काम करना,
क्योंकि डोर हमारे हाथ में है
लक्षण अगर सही ना दिखे तो, 
सोच लो  अगली सत्ता में हम तुम्हारे साथ ना है 
              अगली सत्ता में हम तुम्हारे साथ ना है।

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