Saturday, July 4

मातृभाषा हिंदी / Poem on HINDI Diwas (हिंदी दिवस/अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस)



  मातृभाषा हिंदी 



हिंदी को पाया- 


पाया है मैंने पाया है, फिर से हिंदी का जमाना आया है 
जिस राष्ट्र का नाम ही हिंद है वहां फिर से किसी ने हिंदी को गुनगुनाया है 




लगता है आज हिंदी का उसकी आजादी में पाया है 
अब उसके ही अधिकारों के स्वतंत्रता की छाया है 




गुलामी तो बहुत सालों से थी 
पर 70-80 साल में पहली बार किसी राष्ट्रपति का भाषण हिंदी में आया है 
वाकई मेरी नजर में आज उन्होंने देश का प्रथम नागरिक का औहदा पाया है 
वाकई मेरी नजर में आज उन्होंने देश का प्रथम नागरिक का औहदा पाया है 




देश के वजीर/प्रधानमंत्री ने विदेशों में भी अपनी मातृभाषा(अपनी राष्ट्रीय भाषा) में भाषण सुनाया है 
तो हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा पाया है 
तो हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा पाया है 




जब लोकसभा में हिंदी भाषण से हिंदी की महत्ता को बढ़ाया है 
तो इस दुनिया में फिर से अपनी भाषा का परचम लहराया है 
हिंदी दिवस को अब दुनिया ने “अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस” के रूप में मनाया है 
देख लिया है मैंने, इस भाषा ने दुनिया से लौहा मनवाया है 
देख लिया है मैंने, इस भाषा ने दुनिया से लौहा मनवाया है 




अब दुनिया में मैं, चीख-चीख के कहता हूं-
कि हिंद राष्ट्र का प्राणी हूं ,जिस भाषा का शब्द है “ओ३म्
उस ध्वनि को सुना ग्रहों से नासा ने भी गुनगुनाता इसका नाम 
उस ध्वनि को सुना ग्रहों से नासा ने भी गुनगुनाता इसका नाम।

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