Sunday, July 5

भारतीय संस्कृति एवं मूल्य व्यवस्था (Indian culture and value system)

भारतीय संस्कृति एवं मूल्य व्यवस्था
(Indian culture and value system)


परंपरा,प्रतिष्ठता,सभ्यता समाज से 
एकता,अखंडता,रुपता समाज से 
धरोहरें,दृढ़ता का रुप है समाज से 
महानता की श्रंखला भी है यहां समाज से।

विश्व मैं पहचान दिलाती है ये संस्कृति 

मूल्य अवधारणा का प्रारूप है ये संस्कृति 
अनेक राज्यों की एकता दिखाती है ये संस्कृति 
अपनी पहचान विदेशों में भी झलकाती है ये संस्कृति। 

व्यक्तित्व निखार दिखता है इस संस्कृति की धार में 

प्रबुद्ध प्रकाश झलकता है इस संस्कृति की जार में 
भाषाओं का रूप बदलता है यहां हर राज्य में 
पहनावे का रंग बदलता है यहां हर अंदाज में 
खाने की मिठास बदलती है यहां हर हाथ में 
घर की सौम्यता दिखती है यहां हर त्योहार पें   
परंपरा निर्वहन होती है यहां हर द्वार पें  
परंपरा निर्वहन होती है यहां हर द्वार पें  

मूल्य बहुत है इसका –


विदेशी भी यहाँ आते हैं खूब रंग जमाते हैं 

अलग-अलग क्षेत्रों के पहनावा पहन फोटो यहां खिंचवाते हैं 

सभ्यता नहीं छूटी है यहां, सभ्यता नहीं छूटी है यहां-


जब आज भी कोई भारतीय मूल विदेशी ऑफिस जाता है

मां बाप के पैर छूना ना भूल पाता है 
घर में दो अगरबत्ती श्रद्धा से जलाता है 

इसीलिए इस भूमि को कहते हैं भारत माँ   

इसीलिए इस भूमि को कहते हैं भारत माँ 
क्यूंकि मां बिन कैसे मिले प्राथमिक गुणों की छाँ  
क्यूंकि मां बिन कैसे मिले प्राथमिक गुणों की छाँ  

संस्कृति सभ्यता सब यहां समान है 

हर ढाई सौ किलोमीटर(250km) पर एक नई भाषा की पहचान है
हर क्षेत्र की मिठास से इसकी विदेशों भी शान है
इसीलिए भारतीय संस्कृति का विश्व में सम्मान है
इसीलिए भारतीय संस्कृति का विश्व में सम्मान है 


यह पुराणी है,प्रतिष्ठित है,सम्मानित है,सामाजिक है 

वेदों से है,पुराणों से है,प्राचीनता का अंश है 
उत्कृष्ट है,विशिष्ट है,सरोकारों से समृद्ध है
राग है,अलाप है,धुन है तो स्वर है 
रंग है,रूप है,रूप का ये सौंदर्य है 
पारंपरिक है,शील है,विकास की ये मूल है 
समान है,समाज ये समानता का कानून है 
यह भारतीय संस्कृति है जिसकी धरोहरें भी इसकी शान हैं। 
यह भारतीय संस्कृति है जिसकी धरोहरें भी इसकी शान हैं। 

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