Sunday, July 5

desi Shayari

   ? आज भी समस्या का अंतिम हल
               माफ़ी है, ‘कर’ दो या ‘मांग’ लो।


         ? समय के पास इतना समय नहीं कि…
              वो आपको दुबारा समय दे सके…!!


         ? समस्याओं की अपनी कोई साइज नहीं होती दोस्तों!!

वह तो हमारे हल करने की क्षमता पर निर्भर करती है की 

छोटी होगी या बड़ी होगी?

         ?  एक डॉक्टर द्वारा लिखी बेहतरीन लाइन..!!!
               दवा में कोई खुशी नहीं……
              और खुशी जैसी कोई दवा नहीं..!!!

 ? “सार्वजनिक”​ रूप से की गई “आलोचना”,​
​              “अपमान”​ में बदल जाती है ।।
                                     और ….
​              “एकांत”​ में बताने पर, ​”सलाह”​ बन जाती है..!!       

 ?  दोस्त – 
               किताब , रास्ता , और  सोच!
               गलत हों तो गुमराह कर देते हैं,  
               और सही हो तो जीवन बना देतें हैं !!     

   ? तारीफ की चाहत तो…, नाकामों की फ़ितरत होती है…
              काबिल के तो …., दुश्मन भी क़ायल होते हैं…!!

       ? नसीब वालो को मिलते है, फिकर करने वाले !!
       

 ? मिलते रहना सबसे…., किसी ना किसी बहाने से…
              रिश्ते मजबूत बनते है दो पल साथ बिताने से..!!

   

    ? कोई ताबीज़ ऐसा दो कि मैं चालाक हो जाऊँ
             बहुत नुकसान देती है मुझे ये सादगी मेरी ॥

       ? अपने हौसलों को ये खबर करते रहो…
            ज़िंदगी मंज़िल नहीं, सफर है, करते रहो…!!

 ? हर एक इंसान की दो कहानियाँ होती हैं..!
            एक वो…जो सबको सुनाता है..!
            एक जो…वो सबसे छुपाता है..!

   ? जो दिखता हो, वही सच हो जरूरी नहीं  हैं,
            कभी कभी शांत चेहरे के पीछे, दर्द भी छुपा होता हैं….।।    

 ? बेगाने होते लोग देखे, अजनबी होता शहर देखा
           हर इंसान को यहाँ, मैंने खुद से ही बेखबर देखा।
   

 ? रोते हुए नयन देखे, मुस्कुराता हुआ अधर देखा
            गैरों के हाथों में मरहम, अपनों के हाथों में खंजर देखा।
            मत पूछ इस जिंदगी में, इन आँखों ने क्या मंजर देखा
            मैंने हर इंसान को यहाँ, बस खुद से ही बेखबर देखा।     

? कितना हसीन तमन्नाओं का सफ़र होता है….
   कल की उम्मीद पे हर आज बसर होता है….!!


      ? जब सहारों ने …..ताने दिए,
           हमनें….. बैसाखियाँ फेंक दीं….!!

? रिश्तों को अल्फाजो का मोहताज ना बनाइये ..
           अगर अपना कोई खामोश हैं तो खुद ही आवाज लगाइये ..!!

? मेहमानों की तरह अपने ही घर आते-जाते………..।
       बेघर हो गए हैं लोग कमाते कमाते………!!

? उड़ गए जो परिंदे उनका क्या अफ़सोस करूँ?
           यहाँ तो पाले हुए भी, गैरों की छत पे उतरते हैं !!

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