Friday, September 18

Poetry

Dive into the world of authenticate poetry.

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आधुनिक सच/ Modern Truth (Under which we are forgetting our culture)

  Modern Truth / आधुनिक सच A Beautiful poem on Modern truth - Under which we are forgetting our culture मियां-बीबी दोनों मिल खूब कमाते हैं  तीस लाख का पैकेज दोनों ही पाते हैं सुबह आठ बजे नौकरियों पर जाते हैं  रात ग्यारह तक ही वापिस आते हैं अपने परिवारिक रिश्तों से कतराते हैं अकेले रह कर वह कैरियर बनाते हैं कोई कुछ मांग न ले वो मुंह छुपाते हैं भीड़ में रहकर भी अकेले रह जाते हैं मोटे वेतन की नौकरी छोड़ नहीं पाते हैं अपने नन्हे मुन्ने को पाल नहीं पाते हैं फुल टाइम की मेड ऐजेंसी से लाते हैं उसी के जिम्मे वो बच्चा छोड़ जाते हैं परिवार को उनका बच्चा नहीं जानता है केवल आया'आंटी' को ही पहचानता है दादा-दादी, नाना-नानी कौन होते है ? अनजान है सबसे किसी को न मानता है आया ही नहलाती है आया ही खिलाती है टिफिन भी रोज़ रोज़ आया ही बनाती है यूनिफार्म पहना के स्कूल क...
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what is love? / A beautiful poem which will win your Heart

   What is love??????  love is actually a name of care. Love is when my mom come's 2 me  at night and say "i love you". love is when i come back from work and my dad says " dear take rest". love is when  my brother says" dear come lets have an outing". love is when my best friend call me or says u idiot! feeling bore without me". love when my daughter says i "love u papa". "love is not only having a girlfriend or boy friend but having a good friend too. love is actually a name of care." "If you want to be in someone's future, make an effort to be their present, or all you will ever be is someone from their past."              A Beautiful Poem-    कभी तानों में कटेगी,    कभ...
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फिदरत….A comedy romantic poem

     फिदरत तेरी चाहत को मैं अपना आंचल बना लूंगा  तू एक बार मिल तो सही तुझे कचौरी भी खिला दूंगा क्या खाने में ही तेरा जी मरा है  क्या उसमें भी कोई राज छिपा है  जो बुलाया करती थी मुझे अकेला रात-रात भर  और करवाया करती थी सारा काम गली गरबार पर  पर अब मेरी बारी है  मेरे पास भी दूध छानने की ज़ारी है  छान लूंगा पूरा का पूरा तुझे मैं   अलग कर दूंगा पूरा कचरा तुझसे  डाल दूंगा शक्कर और रंग  पहना दूंगा केसरिया ढंग  तब्दील कर दूंगा मेरी चाहत को........   तब्दील कर दूंगा मेरी चाहत को........   और मेरी पलकों पर भी उठा लूंगा तुझको  फिर भी तुने अगर मुझे अपना ना माना  तो तू शायद मेरी हिस्ट्री(History) नहीं जानती  तो तू शायद मेरी हिस्ट्री(History) नहीं जा...
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बनो राजनेता/poem on politics

  बनो राजनेता बनो राजनेता तुम, बनो राजनेता  निष्पक्ष,सेवाभावी, स्वभाव रखो राजनेता  इस पद के मिलते ही तुम हो जाओगे शक्तिमान  शक्ति की अंधड़ में मत करना इसका अपमान  बनो राजनेता, तुम बनो राजनेता  निष्पक्ष, सेवाभावी, स्वभाव रखो राजनेता  इस पद के लालच में ना तुम किसी को बेचना  शक्तिवान होने के बाद उस ना बिकने वाले को मत फेंकना  विश्वास जीतना, भरोसा तोड़ना नहीं  पैसों की आड़ में, तुम अपना काम भूलना नहीं  बनो राजनेता, तुम बनो राजनेता  निष्पक्ष, सेवाभावी ,सद्भावना रखो राजनेता   जरूरत है इस भूमि को तुम इसका साथ देना  अपनी मर्यादा ना तोड़, कहीं इसे और लूट न लेना  अपने नेतृत्व क्षमता का सदुपयोग करना  जो-जो किल्लतें हमने हैं बताई उसे तुम पूरा करना  बनो राजनेता, तुम ब...
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मातृभाषा हिंदी / Poem on HINDI Diwas (हिंदी दिवस/अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस)

  मातृभाषा हिंदी  हिंदी को पाया-  पाया है मैंने पाया है, फिर से हिंदी का जमाना आया है  जिस राष्ट्र का नाम ही हिंद है वहां फिर से किसी ने हिंदी को गुनगुनाया है  लगता है आज हिंदी का उसकी आजादी में पाया है  अब उसके ही अधिकारों के स्वतंत्रता की छाया है  गुलामी तो बहुत सालों से थी  पर 70-80 साल में पहली बार किसी राष्ट्रपति का भाषण हिंदी में आया है  वाकई मेरी नजर में आज उन्होंने देश का प्रथम नागरिक का औहदा पाया है  वाकई मेरी नजर में आज उन्होंने देश का प्रथम नागरिक का औहदा पाया है  देश के वजीर/प्रधानमंत्री ने विदेशों में भी अपनी मातृभाषा(अपनी राष्ट्रीय भाषा) में भाषण सुनाया है  तो हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा पाया है  तो हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा पाया है  जब लोकसभा&nb...
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आया फिर ये सावन आया

आया फिर ये सावन आया  आया फिर ये सावन आया  पतझड़ के मौसम को फिर भगाया  नई खुशबू नए रंगों को लाया  हम सबके मन को बहुत है भाया  हम सबके मन को बहुत है भाया   नया-नया मौसम ले आया  हल्की बिंदु की बौछार ले आया  अमन, खुशहाली, चैन है लाया  फूलों की लहर, खुशियों की महक है लाया  आया फिर ये सावन आया  हम सबके मन को बहुत है भाया  हम सबके मन को बहुत है भाया  फिर क्यों भूल गया ये कहीं  नहीं ला पाया वो सोच नयी   भ्रष्ट नीतियां अभी भी है यही  क्या नहीं धो पाया ये सरज़मी ?  क्यों ये हर बार भूल जाता है ? क्यों हर बार जवाब ना पाता मैं ? क्या इसकी वजहें रह जाती है ?  क्या जानबूझ कर नहीं बतलाता ये ?  फिर क्या है मतलब इस ऋतु का  फिर क्या मतलब ऐसे इंद्रधन...
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राहगीर/ क्योंकि कल का सूरज फिर उगेगा…

  राहगीर मैं तो राहगीर हूं राह करता रहूंगा  कल का सूरज फिर उगेगा  नई रोशनी नई उमंग नई राह लाएगा  क्योंकि कल का सूरज फिर उगेगा।। फर्क है दोनों में, राहगीर और पथिक में  पता नहीं लोगों को इनमें,पता नहीं लोगों को इनमें क्योंकि पथिक पथ पर चलेगा और मैं तो राहगीर हूं राह करता रहूंगा                                                 और मैं तो राहगीर हूं राह करता रहूंगा   उलझन है एक समस्या है मेरी वह तो पथिक था चल दिया वहां भी जहां गलियां थी अंधेरी  और उलझ गया गहरी सोच में मैं, और कर दी मैंने देरी  अब मुश्किल है चुनना रास्ता इनमें  समान हैं दोनों किनारे इनमें  कांटों और पत्थरों का संग...
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आंसू……

    आंसू ये आंसू कैसे हैं ये आंसू ?  क्यों है ये आंसू ? क्यों नम है ये आंसू ?  क्या ये आंसू भी कुछ बोल रहे हैं ? पर कोई इनकी सुनता क्यों नहीं है ? वजहें तो बहुत है इन आंसुओं की  पर शायद ही कोई मरहम हैं इन आँसुओ की   इसमें राग है विराग है उस विराग की ये साख है  इसमें संवेदना है ढृढ़ता है उस ढृढ़ता का ये झरना है  इसमें आग है तेज है उस तेज का प्रकाश है ये   इसमें आवाज है चीख है उस चीख का दर्द है  इसमें संबंध है विश्वास है उस विश्वास की ही आस है  इसमें उमंग है जोश है उस जोश की ज्वाला है  इसमें तट है किनारा है उस किनारे की पथवार है   इसमें सख्ती है कानून है उस कानून की पहचान है  इसमें भूख है प्यास है उस प...
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वजह ढूंढता हूं ! (Wajah dhundhta hun)

वजह ढूंढता हूं ! मैं ढूंढता हूं, बहुत कुछ ढूंढता हूं  मैं ढूंढता हूं, बहुत कुछ ढूंढता हूं पाता हूं इस पिछड़ी सोच को पर फिर भी ढूंढता हूं  दूसरों की सफलता पर उस ईर्ष्या वाली सोच को ढूंढता हूं  सफलता में बाधक बने उस आलस्य की जड़ को ढूंढता हूं  लोगों के मुंह का उपहास बनी उस दुर्बलता का रहस्य को ढूंढता हूं  ढूंढता हूं, कुछ ढूंढता हूं  हां! अब भी मैं कुछ बोलता हूं  ऐसा नहीं है कि सिर्फ नकारात्मकता को ही ढूँढता हूं  ऐसा नहीं है कि सिर्फ नकारात्मकता को ही ढूंढता हूं.......  मिट चुके उन परिवारों के संयोजन का राज ढूंढता हूं  उन पैरों तले दबी मिट्टी की खुशबू को ढूंढता हूं  उन प्रकृति के बर्बादी के रसायनों को ढूंढता हूं  उन प्रगति के पीछे छिपी दूसरों की मेहनत को ढूंढता हूं  हाँ... उन आशी...
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भारतीय संस्कृति एवं मूल्य व्यवस्था (Indian culture and value system)

भारतीय संस्कृति एवं मूल्य व्यवस्था (Indian culture and value system) परंपरा,प्रतिष्ठता,सभ्यता समाज से  एकता,अखंडता,रुपता समाज से  धरोहरें,दृढ़ता का रुप है समाज से  महानता की श्रंखला भी है यहां समाज से। विश्व मैं पहचान दिलाती है ये संस्कृति  मूल्य अवधारणा का प्रारूप है ये संस्कृति  अनेक राज्यों की एकता दिखाती है ये संस्कृति  अपनी पहचान विदेशों में भी झलकाती है ये संस्कृति।  व्यक्तित्व निखार दिखता है इस संस्कृति की धार में  प्रबुद्ध प्रकाश झलकता है इस संस्कृति की जार में  भाषाओं का रूप बदलता है यहां हर राज्य में  पहनावे का रंग बदलता है यहां हर अंदाज में  खाने की मिठास बदलती है यहां हर हाथ में  घर की सौम्यता दिखती है यहां हर त्योहार पें    परंपरा निर्वहन होती है यहां हर द्वार प...