Thursday, September 17

आया फिर ये सावन आया





आया फिर ये सावन आया 




आया फिर ये सावन आया 
पतझड़ के मौसम को फिर भगाया 
नई खुशबू नए रंगों को लाया 
हम सबके मन को बहुत है भाया 
हम सबके मन को बहुत है भाया  




नया-नया मौसम ले आया 
हल्की बिंदु की बौछार ले आया 
अमन, खुशहाली, चैन है लाया 
फूलों की लहर, खुशियों की महक है लाया 




आया फिर ये सावन आया 
हम सबके मन को बहुत है भाया 
हम सबके मन को बहुत है भाया 



फिर क्यों भूल गया ये कहीं 
नहीं ला पाया वो सोच नयी  
भ्रष्ट नीतियां अभी भी है यही 
क्या नहीं धो पाया ये सरज़मी ? 



क्यों ये हर बार भूल जाता है ?
क्यों हर बार जवाब ना पाता मैं ?
क्या इसकी वजहें रह जाती है ? 
क्या जानबूझ कर नहीं बतलाता ये ? 




फिर क्या है मतलब इस ऋतु का 
फिर क्या मतलब ऐसे इंद्रधनुष का 
जो पूर्णतया रंगों का है 
पर बेरंग सा लगता है।। 




याद दिला दुँ  ऐ सावन मैं
याद दिला दुँ  ऐ सावन मैं कि 



अगली बार ना आना तू 
आए तो भूल न जाना तू 
नई खुशियां भी लाना तु 

पर पुरानी कुरीतियों को भी ले जाना तु 
इस अहंकार को भी ले जाना तु  
इस रूढ़िवादी सोच को भी मिटाना तु  
इस रूढ़िवादी सोच को भी मिटाना तु 


क्योंकि अब तू ही तो है केवल मेरा सहारा 
क्योंकि अब तू ही तो है केवल मेरा सहारा 
बस छोड़ ना देना साथ वरना हो जाऊंगा अकेला बेचारा 
                                    वरना हो जाऊंगा अकेला बेचारा।

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