Sunday, July 5

व्यथा! || Real Zindagi

व्यथा !

व्यथा है एक मेरी व्यथा,

व्यथा सुनाना चाहता हूँ।
कुछ दिल से अब गुनगुनाना चाहता हूँ।


लिख लिया है अब मैंने बहुत कुछ

बस अब इसे शुरूआत से दोहराना चाहता हूँ ।


इस ज्ञान के समंदर से दो घूँट पीना चाहता हूँ।

इस कटाक्ष आरोपों पर मिठास की मरहम लगाना चाहता हूँ।
भाईचारे की बात सभी करते है पर मैं व्यक्तित्व में भाईचारा लाना चाहता हूँ।
बदला नहीं जा सकता किसी को पर उन्हेंं स्वीकारने का प्रयास करना चाहता हूं।
एहसास को छलने वालों को एहसास की भाषा सिखाना चाहता हूं।
द्वेष ईर्ष्या को शब्दों से भाव देना चाहता हूं।
बस ऐसी छोटी व्यथा है मेरी जिसे मैं सुनाना चाहता हूं ।
                                     जिसे मैं गुनगुनाना चाहता हूं।


                                                                                  

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