Friday, September 18

आंसू……


    आंसू




ये आंसू कैसे हैं ये आंसू ? 
क्यों है ये आंसू ?
क्यों नम है ये आंसू ? 
क्या ये आंसू भी कुछ बोल रहे हैं ?
पर कोई इनकी सुनता क्यों नहीं है ?

वजहें तो बहुत है इन आंसुओं की 
पर शायद ही कोई मरहम हैं इन आँसुओ की  

इसमें राग है विराग है उस विराग की ये साख है 
इसमें संवेदना है ढृढ़ता है उस ढृढ़ता का ये झरना है 

इसमें आग है तेज है उस तेज का प्रकाश है ये  
इसमें आवाज है चीख है उस चीख का दर्द है 

इसमें संबंध है विश्वास है उस विश्वास की ही आस है 
इसमें उमंग है जोश है उस जोश की ज्वाला है 

इसमें तट है किनारा है उस किनारे की पथवार है  
इसमें सख्ती है कानून है उस कानून की पहचान है 


इसमें भूख है प्यास है उस प्याज की बूंद है 
इसमें ममत्व है मोह है उस मोह की परिभाषा है 


इसमें रोष है रूप है उस रूप का सौंदर्य है 
इसमें भंग है तो रंग है उस रंग की दृष्टि है 


इसमें भाव है भेद है उस भेद का फर्क है 
इसमें बिजली है धारा है उस धारा का प्रवाह है 


इसमें सोच है विचार है उस विचार की जड़ है 
इसमें आग है तो तप है उस तप की ज्वाला है 


इसमें शीलता है तो शांति है उस शांति का अभिमान है 
इसमें तरंग है तो ध्वनि है उस ध्वनि की आवाज है 


इसमें करुणा है तो क्रोध है उस क्रोध का रहस्य है 
इसलिए ये आंसू है ये बूंद है उस बूंद का दर्द है
                                           उस बूंद का दर्द है। 

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