Sunday, September 27

हैं मातृभूमि! मातृभूमि! मातृभूमि! || Real Zindagi

क्या लिखु  मैं, कैसे लिखु | 
जब जब बैठा कुछ लिखने,
मैंने कुछ कुछ हैं सोचा| 
पहला ख्याल आया तेरी 
अखंडता, रूढ़ता तेरा सौन्दर्य का, 
फिर मेरा मन्न वापस भर आया|| 

ऐसा नहीं की मुझे जलन हुई 
बस सिर्फ ऐसा हैं यह कि, 
यहाँ नहीं समझता कोई, 
सब सवार्थ देखने लगे  हैं,,
ऐसी विचित्र मोह माया मैंने फसने लगे हैं || 


अपना अपना नहीं रह गया
यहाँ पराया भी अपना लगने लगा|| 
अपना घर परिवार सब कहते हैं सुरक्षित हो 
पर नहीं चाहते किसी और का || 


इस दुःख पर व्यथा नहीं करता हूँ 
पर फिर अब कुछ नया सोचता हु
पर फिर अब कुछ नया सोचता हु 

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