Wednesday, June 3

ऐ जिंदगी कुछ तो बोल (zindagi) || Real Zindagi

ऐ  जिंदगी कुछ तो बोल,
कुछ तो बोल,

क्योंकि कुछ जानना है मुझे,
मुझे भी जानना है,
तेरी जिंदगी के उतार-चढ़ाव,
क्योंकि थक गया हूं मैं भी
इन लोगों से||
सोच ऐसी थी कि थकान भी  थक जाए,
उदारता, दयनीयता जैसे बच्ची नहीं ||
जानता हूं तू बोलेगी नहीं,
पर बताएगी जरूर !
इसलिए कहता हु कुछ बताने से पहले,
कुछ बोल दे|| 
बच जाऊंगा उस दुनियादारी से
बच जाऊंगा इस  राजनीति से
क्योंकि अब तो यह हर घर-घर में होने लगी   है| 
हर घर की खुशियां छीनने लगी है,
इसलिए कहता हूं ,
चुप रहना चाहता हूं,
इस सोच से बचना चाहता हूं|| 
ऐसा नहीं की जीना छोड़ना चाहता हूं,
ऐसा नहीं  कि हिमालय  जाना चाहता हूं,
बस इस दकियानूसी सोच के समंदर 
से बचना चाहता हूं ||
इसलिए कहता हूँ  ,
कुछ तो अपने अनुभव को बोल , कुछ तो बोल,
ऐ ज़िंदगी कुछ बोल ,ऐ ज़िंदगी कुछ तो बोल. …….. 





क्यूंकि-
              ” बिना कुछ बोले भी यहाँ लोग सोच के विपरीत सोचने लगते हैं | “

                                                                                                                                                        -By M&M                                       

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